कैसे सिंदारोव बने कैंडिडेट विजेता ? कैसा होगा गुकेश से मुकाबला?
इस समय पूरी शतरंज की दुनिया में एक किसी एक खिलाड़ी के सबसे ज़्यादा चर्चे है तो वह उज़्बेकिस्तान के 20 वर्षीय जावोखिर सिंदारोव, वो सिंदारोव जो अपने खेल जीवन की शगुरुआत से ही उनके ही देश की बेहतरीन प्रतिभा अब्दुसत्तारोव नोदीरबेक की छाया में दुनिया को नज़र नहीं आते थे अब फीडे विश्व कप और कैंडिडेट जीतकर उपलब्धियों के मामले में अपने साथी को पीछे छोड़ते नजर आते है, सिंदारोव का उभार भी कुछ वैसा ही है जैसे भारत में निहाल, प्रज्ञानन्दा और अर्जुन के बीच में से अचानक गुकेश नें एक रफ़्तार पकड़ी थी और कुछ ऐसे आगे निकले की विश्व चैंपियन बनकर ही दम लिया। तो चलिए इस लेख में हम जानेंगे की सिंदारोव नें कैंडिडेट कैसे अपने नाम किया और गुकेश और उनकी विश्व चैंपियनशिप के बारे में दुनिया इस समय क्या बात कर रही है और मेरा आकलन क्या कहता है? तस्वीरे : फ़ीडे

तूफानी सिंदरोव ले उड़े कैंडिडेट की ट्रॉफी, देखते रह गए दिग्गज!!
फ़ीडे कैंडिडेट के आरंभ के पहले अधिकतर दिग्गज फ़ाबियानो कारूआना को इसका प्रमुख दावेदार मान रहे थे तो प्रज्ञानन्दा और हिकारू नकामुरा पर भी सबकी नजरे थी हालाँकि फ़ीडे विश्व कप जीतकर जावोखीर सिंदारोव अंदरखाने दुनिया को अपने शीर्ष स्तर पर आगमन का अंदेशा दे चुके थे, पिछले साल फ्रीस्टाइल शतरंज हो या इस साल टाटा स्टील मास्टर्स उन्होंने यह दिखा दिया था कि वह भी शीर्ष पर अब बने रहने के लिए तैयार है पर फिर भी कई लोगो का यह मानना था कि फ़ीडे विश्व कप से कैंडिडेट काफ़ी अलग होगा और पहली बार खेल रहे इस युवा खिलाड़ी के लिए यह आसान नहीं होने वाला है लेकिन जब कैंडिडेट आरम्भ हुआ तो ऐसा लगा की सिंदारोव तो बस इसे जीतने ही आए है!
हम उनके इस प्रदर्शन को प्रतियोगिता की तरह ही दो हिस्सों में बांट देते है पहले हिस्सा पहले सात राउंड और फिर आठ से अंतिम राउंड तक!
पहले सात राउंड : दिग्गजों के खिलाफ हैट्रिक नें तोड़ा सबका भ्रम
प्रतियोगिता आरम्भ होने के पहले अगर कोई कहता की सिंदारोव लगातार तीन बाजियों में प्रज्ञानन्दा म फैबियानो और नाकामुरा को हरा देंगे तो शायद ही कोई यकीन करना पर सिंदारोव नें जैसे अपने स्तर को कुछ ऐसा ऊँचा उठा लिया था जिसे पीछे छोड़ना इन सब बड़े नामों के लिए बड़ा मुश्किल था!
पहला राउंड

किसी भी प्रतियोगिता की अच्छी शुरुआत आपको अच्छी ले दिला सकती है और सिंदारोव के साथ भी ये हुआ, रूस के आंद्रे एसिपेंको के ख़िलाफ़ उन्होंने ओपनिंग के बाद थोड़ी सी दबी बाजी को उन्होंने अपने सक्रिय खेल से पहले बेहतर बनाया और एसिपेंको से कुछ कठिन सवाल पूछने शुरू किए परिणाम उन्होंने खेल का अंत शह मात लगाते हुए किया , इस खेल में सिंदारोव नें दिखाया की वह अचानक से खेल का रूख अपने पक्ष में मोड़ देने की कला जानते है

इसके बाद वो हुआ जिसकी किसी नें भी उम्मीद नहीं की थी दूसरे राउंड में मैथियास ब्लूबम से ड्रा खेलने के बाद सिंदारोव नें एक एक करके प्रतियोगिता के सभी बड़े दावेदारों को पराजित कर शतरंज विशेषज्ञों को भी सन्न कर दिया , उन्होंने लगातार तीन बाज़ियों में सबसे पहले प्रज्ञानन्दा, फिर फैबियानो कारुआना और फिर नाकामुरा को मात दे दी , बड़ी बात यह की लगातार जीत आने का मतलब है की उनके सभी प्रतिद्वंदी इस बात को अच्छे से जानते थे सिंदारोव जोरदार लय में है और कैंडिडेट जैसी प्रतियोगिता में हर कोई अपना पूरा ज़ोर लगा रहा होता है ऐसे में इन तीनो की कोई असावधानी सिंदारोव की जीत का कारण नहीं थी वह इन तीनो बाजियों में अपने विरोधियों पर शतरंज के हर पहलू पर भारी पड़े थे. और सबसे ख़ास बात इस दौरान सिंदारोव बहुत तेज खेल रहे थे और उनकी ओपनिंग की तैयारी बेहतरीन थी।

जैसे प्रज्ञानन्दा के ख़िलाफ़ मोहरा कुर्बान करके खेलना लाजबाब था वह भी काले मोहरो से

तो कारुआना के ख़िलाफ़ पहले ओपनिंग में बेहतर पकड़ और करुआना के कमजोर राजा को वाक़ई कमज़ोर साबित करना, उन्हें वापसी का कोई मौका ना देना समय से मोहरो को एक्सचेंज करना और ख़ुद के मोहरो का शानदार तालमेल कायम रखना इस खेल में सब नजर आया था.

और फिर नाकामुरा के ख़िलाफ़ आई वह बाजी जिसे शायद नाकामुरा कभी याद नहीं करना चाहेंगे,नोटबूम मार्शल गेम्बिट में जैसे सिंदारोव नें अपनी शानदार तैयारी, तेजी से सटीक चालें चलने की काबलियत से खेल को एकतरफा बनाया वह देखने लायक था ।

इन तीन बाजियों से सिंदारोव नें कैंडीडेट को मनोवैज्ञानिक तौर पर जीत लिया था, एक ओर सिंदारोव थे जो एक ऐसे तेज रफ्तार घोड़े के जैसे दौड़ रहे थे जिसकी बराबरी में कोई नजर नहीं आ रहा था, यह साफ़ था वह अपने खेल जीवन की सबसे बेहतरीन शतरंज खेल रहे थे और अब कारुआना जैसे खिलाड़ी भी यह बात कर रहे थे की जो भी सिंदारोव से खेल रहा है मैं उसके पक्ष में हूँ मतलब अब बात यह थी कि कोई तो उनको हरा दे पर इतिहास कुछ और बनना तय हो चुका था .

इसके बाद आया छठवाँ राउंड जब ऐसा लगा की वेई यी जिनके लिए यह स्पर्धा पहले ही ख़राब बीट रही थी सिंदारोव के ख़िलाफ़ अपनी विश्व कप की मनोवैज्ञानिक हार से बाहर नहीं निकल पाये लगभग बराबर लग रही बाजी में उन्होंने पहले एक चाल के लिए 45 मिनट से अधिक का समय लिया और समय के दबाव में सिंदारोव के सामने बुरी तरह बिखर गए. सिंदारोव अब तक 5.5 /6 पर पहुँच गए थे और उनको रोकना बाक़ी सब के लिए हर बीतते राउंड के साथ मुश्किल बनता जा रहा था । सातवें राउंड में उन्होंने अनीश गिरी से ड्रा खेलते हुए 6/7 के स्कोर के साथ पहला पड़ाव पार किया इस समय तक

कारुआना उनसे 1.5 अंक तो प्रज्ञानन्दा और अनीश 2.5 अंक पीछे चल रहे थे मतलब साफ़ था अगर सिंदारोव को पीछे छोड़ना है तो ना सिर्फ़ सबको पहले पड़ाव से अच्छा खेलना था बल्कि उन्हें सिंदारोव के ख़राब खेलने की ज़रूरत थी जिसकी उम्मीद कम ही नजर आ रही थी!
अंतिम सात राउंड : अनीश नें लड़ी हारी हुई लड़ाई, नहीं रुके सिंदारोव
जब कैंडिडेट का दूसरा पड़ाव शुरू हुआ और अब बारी थी उन सभी खिलाड़ियों से वापस एक एक करके टकराने की तो यह साफ़ था कि अगर सिंदारोव नें इस बार संतुलित खेलते हुए सात में से अधिकतर ड्रा खेले और एक जीत भी दर्ज की तो किसी का आसाधारण प्रदर्शन भी उन्हें रोजक नहीं पायेगा, दूसरे पड़ाव में सिंदारोव नें ठीक वैसा ही प्रदर्शन किया, उन्होंने दूसरे पड़ाव में सात राउंड में छह ड्रा और एक जीत के साथ 4 अंक जुटाए और 10 अंकों के साथ विजेता बन गए.

अंतिम सात राउंड में अनीश अकेले ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने सिंदारोव से अधिक कुल 5 अंक बनाए पर किसी भी अन्य कैंडिडेट में शायद यह प्रदर्शन खिताब के लिए काफ़ी होता पर यहाँ अनीश 8.5 अंक बनाकर दूसरे स्थान पर रहे , एक समय यह स्थिति जरूर थी कि अगर अनीश वे यी और एसिपेंको से जीतकर सिंदारोव को पराजित कर दे तो अनीश के लिए मौका बन सकता था पर यह हो ना सका।
वो जीत जिसके बाद खिताब लगभग हुआ तय

खैर दूसरे पड़ाव में मतलब राउंड नम्बर 10 में सिंदारोव का आमना सामना हुआ एक बार फिर प्रज्ञानन्दा से लेकिन इस बार प्रज्ञानन्दा नें आक्रामक होना चुना पर एक बार फिर एक मोहरा क़ुर्बान करते हुए सिंदारोव नें प्रज्ञानन्द को लगभग पहले मुक़ाबले की तरह ही एक ऐसी स्थिति में डाल दिया जहाँ मोहरा अधिक होने के बाद भी राजा का सुरक्षित ना होना और मोहरों का सक्रिय ना होना उनके लिए भारी पड़ा और सिंदारोव नें लगातार दूसरी बार प्रज्ञानन्दा को हरा दिया जिसकी उम्मीद शायद किसी ने भी नहीं की थी.

यह जीत सिंदारोव को 8 अंकों पर पहुंचा चुकी थी और इसके बाद उन्होंने एक मज़बूत और पेशेवर खेल दिखाते हुए कारुआना, नाकामुरा,अनीश और वे यी से ड्रा खेलते हुए इतिहास रच दिया .
विश्व शतरंज चैंपियनशिप 2026 : दोम्मराजू गुकेश Vs जावोखिर सिंदारोव

विश्व शतरंज इतिहास की सबसे युवा विश्व शतरंज चैंपियनशिप होने को है दो लगभग 20 साल के युवा विश्व ख़िताब के लिए टक्कर लेंगे यह होना तो था फिर यह 2026 में होगा किसी नें नहीं सोचा था, वर्तमान लाइव रेटिंग में गुकेश 2732 अंकों के साथ विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर है जबकि सिंदारोव अपने खेल जीवन की सर्वश्रेष्ठ रेटिंग 2775 के साथ विश्व रैंकिंग में पांचवें स्थान पर पहुंच गए है. रेटिंग और मौजूदा फॉर्म तो सिंदारोव को फेवरेट बनाता है पर क्या शतरंज सिर्फ़ नम्बर का खेल है आइए इसको समझने की कोशिश करते है.
दोम्माराजू गुकेश

सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग 2794 अक्तूबर 2024
विश्व शतरंज चैंपियन 2024- वर्तमान
फ़ीडे कैंडिडेट चैंपियन 2024
फ़ीडे शतरंज ओलंपियाड व्यतिगत स्वर्णपदक 2022
फ़ीडे शतरंज ओलंपियाड टीम कांस्य पदक 2022
फ़ीडे शतरंज ओलंपियाड टीम चैंपियन 2024
फ़ीडे शतरंज ओलंपियाड व्यतिगत स्वर्णपदक 2022
2024 गुकेश के लिए उनका सर्वश्रेष्ठ साल था और उन्होंने उस साल कुछ ऐसे परिणाम हासिल किए जो किसी के लिए दोहराना मुश्किल है मसलन वह दो बार शतरंज ओलंपियाड के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे है वह भी पहले बोर्ड पर जो काम कार्लसन भी अब तक नहीं कर पाये है, पिछल दो ओलंपियाड में उनके प्रदर्शन नें नए रिकॉर्ड बनाये है एक बार फिर शतरंज ओलंपियाड आ रहा है और वह होगा भी उज़्बेक्सितान में निश्चित तौर पर तब तक विश्व शतरंज चैंपियनशिप की गर्माहट बढ़ चुकी होगी तो मानसिक दबाव बनाने की रणनीति भी शुरू हो जाएगी, गुकेश जिन्हे चुनौतियाँ पसंद है उनके लिए वापसी के लिए इससे बेहतर कोई मंच हो ही नहीं सकता तो देखना होगा कि गुकेश कैसे वापसी करते है, ओलंपियाड के ठीक दो माह पहले वह नॉर्वे शतरंज में भी वापसी करेंगे जहाँ उनका सामना एक बार फिर मैगनस कार्लसन से होगा , यह दो प्रतियोगिताओं में गुकेश का प्रदर्शन विश्व चैंपियनशिप से पहले उनके आत्मविश्वास पर गहरा असर डालेगा जहाँ तक एक पत्रकार के तौर पर मैंने गुकेश को बचपन से देखा है गुकेश ज़ोरदार वापसी करेगा यह मुझे तय नज़र आता है।

गुकेश और सिंदारोव के बीच आख़िरी क्लासिकल बाज़ी इसी वर्ष टाटा स्टील में हुई थी जिसमें गुकेश नें एक शानदार बाजी खेली थी और अपनी रानी का बलिदान देकर खेल को जीतने के करीब पहुंच गए थे पर सिंदारोव नें अंतिम समय में गुकेश के राजा पर अपने वजीर से लगातार हमला करते हुए बाजी ड्रा करा ली थी
चैलेंजर सिंदारोव कितना है तैयार?

फ़ीडे शतरंज ओलंपियाड टीम चैंपियन 2022
फ़ीडे विश्व कप विजेता 2025
फ़ीडे कैंडिडेट विजेता 2026
अभी की बात करे तो सिंदारोव एकदम तैयार नज़र आते है , वह विश्व कप जीत चुके है कैंडिडेट जीत चुके है और 50से भी अधिक क्लासिकल बाज़ियों से हारे नहीं है और अपराजित है , रेटिंग ऑल टाइम हाई है लेकिन कुछ बाते है जिन पर अभी उनकी परीक्षा होना बाक़ी है सबसे बड़ी बात यह की अब जबकि वह विश्व नम्बर पाँच की हैसियत से कोई टूर्नामेंट खेलेंगे तो हर खिलाड़ी का उनके प्रति नजरिया और तैयारी बदली हुई होगी, जब वो कोई बाज़ी हारेंगे या कुछ मुकाबले ख़राब बीतेंगे तो वो वापसी कैसे करेंगे? उनके प्रतिद्वंदी वापसी करने में माहिर माने जाते है, शतरंज में शीर्ष स्तर पर रेटिंग को टॉप पर बनाए रखना सबसे मुश्किल काम है और अब सिंदारोव इसे कैसे करते है यह भार भी उन पर होगा, सिंदारोव के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं होने वाली है मतलब वह एक अच्छी टीम बना सकते है, देखना यह भी होगा की क्या शतरंज ओलंपियाड में गुकेश और सिंदारोव के बीच मुकाबला हो सकता है? गुकेश की यह दूसरी और सिंदारोव की पहली विश्व चैंपियनशिप होगी और इसका दबाव भी उनके शुरुआती कुछ मुकाबलों में जरूर पड़ेगा. यह बात तो साफ़ है कि सिंदारोव आत्मविश्वास से भरे हुए है और गुकेश को उम्मीद के अनुसार एक कड़ा प्रतिद्वंदी मिला है.
कुल मिलाकर मेरा मानना है की गुकेश का पड़ला भारी ज़रूर दिखाई पड़ता है क्यूंकि शीर्ष स्तर पर उन्होंने सिंदारोव के मुकाबले ज़्यादा मुक़ाबले खेले है तो अगर गुकेश अपनी लय को वापस हासिल कर पाये तो सिंदारोव के ख़िलाफ़ वह विश्व चैंपियनशिप का अपना ताज बचा सकते है पर सिंदारोव जैसे खिलाड़ी गुकेश को मुश्किल में डालने की हर संभव कोशिश करेंगे तो हम कह सकते है की आगामी विश्व चैंपियनशिप शायद पिछले कुछ दशकों की सबसे रोचक विश्व चैंपियनशिप हो सकती है आपको क्या लगता है?